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उत्तम क्षमा धर्म के साथ प्रारंभ हुआ पर्यूषण महापर्व

उत्तम क्षमा धर्म पूरा देश मनाएं
नेकी के समय जाग और बुराई में सो
उत्तम क्षमा धर्म क्षमा विरस्य भूषणम
उज्जैन. दिगम्बर जैन परम्परा का सबसे महान पर्वराज है दसलक्षण (पयूषर्ण पर्व) जो पूरे देश में ही नहीं दुनिया के जिस भी कोने में जैन है वहां पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है। 11 दिनो तक दस धर्मों की पूजा भी की जाती है। जिसमें सबसे पहले जिस धर्म की पूजा की जाती है वह उत्तम क्षमा धर्म है आचार्यो ने सबसे पहले क्षमा को अपनाने का संदेश दिया क्योंकि क्षमा आ गई तो जीवन में सब आ गया। क्षमा विरस्य भूषणम इसलिए तो क्षमा वीरो का आभूषण कहा है। क्षमा भाव यदि मन में आ गया तो समझना जैन धर्म का मूल तत्व आ गया।

वर्ष भर गलतियां होती है परंतु एक मात्र यह धर्म कहता है वर्ष भर आपके गलतीयां की अब दोनो हाथों को जोडकर क्षमा मांगना और क्षमा करना ही मानव धर्म है। क्षमा से प्रारंभ यह पर्व समापन के पश्चात् क्षमावाणी महापर्व की प्रेरणा देता है। पुरी दुनिया में एक ऐसा पर्व है जिसमें मीठा खाया नही जाता बल्कि मीठा बोला जाता है। क्षमा मांगने की परंपरा को निर्वाह करना यह पर्व अपने आप में अनुठा पर्व है। 
यह बात इंदौर रोड़ स्थित श्री महावीर तपोभूमि पर आयोजित धार्मिक शिविर में ज्योतिषाचार्य प्रभा दीदी ने कही। दिगंबर जैन समाज के सचिव व मिडीया प्रभारी सचिन कासलीवाल के अनुसार शनिवार सुबह 5ः30 बजे से ही श्री महावीर तपोभूमि में शिविरार्थीयो द्वारा पूजा-पाठ के साथ शिविर का शुभारंभ हुआ।

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शिविर में ज्योतिषाचार्य प्रभा दीदी ने ने कहा कि नेकी के समय  जागना चाहिए और बुराई के समय सोना चाहिए इच्छाओं का त्याग कर इच्छाओं को ही दबाना चाहिए। 1 वर्ष में पर्युषण पर्व के दौरान इतना धर्म तप त्याग करना चाहिए कि उसका फल पूरे वर्ष और अनंत जन्मों तक मिले अच्छे कार्यों में मन लगाना चाहिए एवं जो अच्छे कार्य करें उनका साथ देना चाहिए। आवेश और क्रोध का समय टालना चाहिए वह समय टल गया तो क्रोध भी टल जाएगा और कहा कि तत्वार्थ सूत्र को सरलता से समझाते हुए कहा कि जो व्यक्ति इन दस दिनों में दस धर्म को समझ लेता है वह व्यक्ति इस संसार रूपी नैया को पार लगा लेता है। दस दिन तक अलग-अलग व सरलता से व सरलता से समझने का यह पर्व पर्यूषण महापर्व कहलाता है। मुंबई गोरेगांव चतुर्मास कर रहे मुनिश्री प्रज्ञासागरजी महाराज का कहना है कि क्षमा पर्व को जैन ही नही अपितु पुरा देश और पुरा विश्व मनाए एवं भारतीय पर्वो के रूप में इसको मान्यता मिले और इसे पुरा भारत मनाए। 

इसे राष्ट्रीय पर्व घोषित किया जाए तब जाकर हम भारत में चेन, सुख, शांती, अमन को ला सकते है। आज पयूषर्ण का दुसरा दिन 27 अगस्त को उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाया जाएगा। सम्पूर्ण व्यवस्था दिगंबर जैन समाज व तपोभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक जैन चायवाला, राजेन्द्र लोहाडिया, धर्मेन्द्र सेठी, ओम जैन, देवेन्द्र जैन, संजय जैन, सुनिल जैन, सुनील जैन ट्रांसपोर्ट, विमल जैन, भूषण जैन, रमेश जैन एकता ज्वेलर्स, सोहनलाल जैन, वीरसेन जैन, गुलजारीलाल बाबा, प्रज्ञा कला मंच की महिलाएं अध्यक्ष विनीता कासलीवाल, हेमंत गंगवाल, सारिका जैन, पलाश लोहारिया, धर्मेन्द्र सेठी व संपूर्ण मंच एवं प्रज्ञा पुष्प की बालिकाओं द्वारा की गई। 

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