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विश्वरूपम मे दिखी गुरुकुल विधाओं की झलक

साबरमती गुरुकुल के विद्यार्थियों की वेशभूषा ने मोहा मन
विभिन्न प्रकाशनों के स्टॉल्स पर ढेरों साहित्य
विभिन्न भारतीय वाद्ययंत्रों का वादन भी आकर्षण का केंद्र
गुरुकुल सम्मेलन विशेष.नीरज थोरात की रिपोर्ट.  विश्वरूपम अपने नाम को चरितार्थ करती यह प्रदर्शनी वास्तव मे आगामी कई वर्षों तक आगन्तुकों के स्मृति पटल पर अंकित रहेगी। आइये आपको इस विश्वरूपम की इस यात्रा पर ले चलें... प्रदर्शनी में प्रवेश करते ही एक सुंदर झांकी का निर्माण किया गया है। इसकी सुंदरता के साथ हमारी अनुभूति और मधुर तब हो जाती हैं, जब साबरमती गुरुकुल अहमदाबाद के शिष्य विभिन्न विशुद्ध भारतीय वाद्ययंत्रों सितार, संतूर, बाँसुरी और सारंगी जैसे क्लिष्ट वाद्यों ओर स्वरलाहरियाँ छेड़ते हैं।

प्रदर्शनी मे पहले कुछ स्टाल्स साबरमती गुरुकुलम अहमदाबाद के ही हैं। इन स्टाल्स पर हमें गुरुकुल के छात्रों द्वारा वैदिक गणित के माध्यम से कई कठिन कैल्क्युलेशन्स(गणना) कुछ ही पलों में हल करके बताई गई। साबरमती गुरुकुलम के ही छात्र मीत ने उपस्थित लोगों के जन्मदिनांक पूछकर उनके जन्मदिन(जन्मवार) की जानकारी कुछ ही पलों में एक दम सटीक दी।
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अगला स्टॉल धर्मरक्षा ट्रस्ट अहमदाबाद का था। यहाँ के  वैदिक ने हमे श्रुतलेखन के बारे में विस्तार से बताया। विदित हो कि श्रुतलेखन वो लेखन पद्धति हैं, जिनमें हमारे प्राचीन ग्रंथ लिखे गए हैं। वैदिक ने हमें बताया कि पद्धति के अंतर्गत घांस के कागज़ पर लेखन किया जाता है, साथ ही साथ ताड़पत्र जो कि श्रीलंका एवम  दक्षिण भारत में ही उपलब्ध होता है, पर भी लेखन किया जाता है। 
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इस पद्धति मे लेखन हेतु बरु की कलम का उपयोग किया जाता है। धर्मरक्षा ट्रस्ट का उद्देश्य श्रुतलेखन को संरक्षित करना एवं इस विधा को बढ़ावा देना है।

प्रदर्शनी मे वेदविज्ञान गुरुकुलम, प्रबोधिनी गुरुकुलम, मैत्रेयी गुरुकुलम तथा नित्यनाद गुरुकुलम सहित अन्य गुरुकुलों के स्टाल्स भी थे। जिन पर गुरुकुलों के छात्रों द्वारा तथा प्रतिनिधियों द्वारा आमजन की जिज्ञासा को सहजता के साथ शांत किया गया।
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प्रदर्शनी में कई प्रकाशनों जैसे  हंसा प्रकाशन, अगमकला प्रकाशन, विद्यानिधि प्रकाशन व शिवालिक प्रकाशन द्वारा भी सहभागिता की गई। जिन पर कई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध थी। प्रदर्शनी में कई संस्थाओं द्वारा हस्तशिल्प की कई वस्तुओं जैसे लकड़ी के सामान, कॉटन के वस्त्र, गौमूत्र से निर्मित औषधियां आदि भी विक्रय हेतु उपलब्ध थी।

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