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नवरात्र:राशि के अनुसार मंत्र का जप कर करवाएं कन्या भोज

नौ वर्ष तक की ​कन्या को ही करवाएं भोज
दस महाविद्या के बराबर होता कन्या भोज
राशि के जातक कन्या पूजन में इस मंत्र का करे जप
उज्जैन.मां भगवती की पूजा में एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है,कन्या पूजन। बिना कन्या पूजन के नवरात्र व्रत पूर्णता प्राप्त नहीं करता। देवीभागवत पुराण के अनुसार पूजाभिश्चैव होमैश्च कुमारिपूजनैस्तथा। सम्पूर्णं तद्‌ व्रतं प्रोक्तं विप्राणां चैव भोजनैः अर्थात पूजन, हवन, कुमारी-पूजन तथा ब्राह्मण भोजन संपन्न करने से नवरात्र व्रत पूरा हो जाता है। कन्या पूजन से साधक पूजा प्राप्त करता है,कन्या पूजन से श्री,धन संपदा,लक्ष्मी,सरस्वती,महान् तेज और सबसे अहम मां की दस महाविद्यायें प्रसन्न होती हैं। ज्योतिषाचार्य पं दयानंद शास्त्री के अनुसार नौ दुर्गा का मतलब नौ वर्ष की कन्या की पूजा करना होता है। कन्या पूजन में एक वर्ष की कन्या से शुरू नौ वर्ष तक की कन्या को भोजन करवाने से मां प्रसन्न होती है। 
किस वर्ष की कन्या का पूजन करने से क्या होता है प्राप्त 
एक वर्ष की कन्या को कुमारिका कहते हैं और इनके पूजन से धन,आयु,बल की वृद्धि होती है।
दो वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति कहते हैं और इनके पूजन से घर में सुख समृद्धि आती है।
तीन वर्ष की कन्या को कल्याणी कहते हैं और इनके पूजन से सुख तथा लाभ मिलते हैं।
चार वर्ष की कन्या को रोहिणी कहते हैं इनके पूजन से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
पांच वर्ष की कन्या को कालिका कहते हैं इनके पूजन से शत्रुओं का नाश होता है।
छह वर्ष की कन्या को चण्डिका कहते हैं इनके पूजन से संपन्नता ऐश्वर्य मिलता है।
सात वर्ष की कन्या को साम्भवी कहते हैं इनके पूजन से दुःख-दरिद्रता का नाश होता है।
आठ वर्ष की कन्या को दुर्गा कहते हैं इनके पूजन से कठिन कार्यों की सिद्धि होती है।
नौ वर्ष की कन्या को सुभद्रा कहते हैं इनके पूजन से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कन्या पूजन के समय कौन सा मंत्र पढ़ना है 
मेष तारा ॐश्रीं ह्रीं स्त्रीं हूं फट
वृष षोडशी ॐ ह्रीं क ए ई ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं
मिथुन भुवनेश्वरी ॐ ऐं ह्रीं श्रीं
कर्क कमला ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हसौ: जगत्प्रसूत्यैनम:
सिंह बगलामुखी ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं नाशय ह्रीं ॐ स्वाहा
कन्या भुवनेश्वरी ॐ ऐं ह्रीं श्रीं
तुला षोडशी ॐ ह्रीं क ए ई ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं
वृश्चिक तारा ॐश्रीं ह्रीं स्त्रीं हूं फट
धनु कमला ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हसौ: जगत्प्रसूत्यैनम:
मकर काली ॐ क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
कुंभ काली ॐ क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
मीन कमला ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं हसौ: जगत्प्रसूत्यैनम:

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