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जो जीवन में बुरे विचार नहीं आने दे वही संस्कार है

महासती के प्रवचन हुए
क्लॉथ मार्केट में आयोजन
संस्कार का महत्व बताया
उज्जैन.नववर्ष के अवसर पर विक्रमादित्य क्लॉथ मार्केट में प्रवचन हुए। इस अवसर पर महासती जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं एवं आयोजक गुप्ता परिवार को नव वर्ष की मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि जब भी वे उज्जैन आती हैं यह प्रवचन जरूर होते हैं। महासती जी ने मंगलवार को शिक्षा.सेवा एवं संस्कार पर प्रवचन दिये। उन्होंने परिवारों में पढ़े लिखे उच्च शिक्षा प्राप्त बच्चों में संस्कारों की कमी का उल्लेख किया व अपने बालकों को संस्कारित करने का आवाहन किया। महासती वंदना श्रीजी ने एक भजन गाये। जिन पर श्रद्धालु झूम उठें।

शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी
नूतन प्रभाजी ने कहा कि आज लोग अपनी संतान को उच्च शिक्षा दिलाने में तो जाग्रत है, परन्तु उनमें शिक्षा के साथ सेवाभावना एवं सुसंस्कार भी आए, इस और किसी का ध्यान नहीं है। आगे कहा कि शिक्षा एवं ज्ञान दो शब्द हैं परन्तु इनमें क्या अंतर है। यह कोई जानता नहीं। जो वाह्य जगत में जीना सिखाती है वह है शिक्षा जबकि ज्ञान आत्मा से जुड़ा हुआ होता है। शिक्षा देने वाले टीचर होते है वे शिक्षा के बदले में पारिश्रमिक लेते हैं। ज्ञान की प्राप्ति गुरु चरणों में, घर में बड़े.बूढ़ों के अनुभवों से होती है। गुरु ज्ञान के बदले में कुछ नहीं लेते। हमें हमारे बच्चों में शिक्षा के साथ सेवा व संस्कार की भावना भी जाग्रत करना चाहिये। उच्च शिक्षा मानव को धनवान बना सकती है। भौतिक साधन उपलब्ध करा सकती है।  धन की व्यवस्था करना सिखा सकती है पर आत्मा को सुख शांति प्रदान नहीं कर सकती।
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संस्कार बुरे विचार नहीं आने देते
नूतन प्रभाजी ने कहा कि संस्कार किसे कहते है जो जीवन में बुराई को बुरे विचारों को न आने दे वही संस्कार है। बालक को प्रथम संस्कार माता से मिलता है। मां बच्चे को शुद्ध भोजन व लाड़.प्यार से कराती है परन्तु आज वो छोटे बच्चे जब तक मोबाइल न देखें भोजन नहीं लेते। घरों में कई वयस्क व्यक्ति भी टीवी के सामने ही भोजन करते हैं। टीवी में जो भाव दर्शाये जाते है वे ही भाव आपके भोजन में भी आ जाते है। उन्होंने ने कहा प्रथम भोजन माता के हाथ काए दूसरा भोजन घरों में कुक के हाथ का एवं तीसरा भोजन होटल का। होटलों में आकर्षक व्यवस्था होती है। खाना वेज एवं नानवेज भी होता है। आज लोग शदियां या कोई उत्सव होटल में ही करते हैं। उन्होंने कहा मनु स्मृति में लिखा है जैसा खावे अन्न वैसा होवें मन। कार्यक्रम का संचालन संयोजक सुनील कुमार श्रीमाल ने किया।

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