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विरोधकृत नामक संवत्सर मचाएगा कोहराम

17 मार्च को खत्म हो रहा है संवत्सर 2074
18 मार्च से शुरू होगा 2075 विरोधकृत संवत्सर
सप्तर्षि संवत है सबसे प्राचीन
उज्जैन. विक्रम संवत 2075,वर्ष 2018 का यह साल कोहराम मचा देने वाला साबित होगा। विरोधकृत नामक   संवत्सर के नाम से ही स्पष्ट हो जाता है,कि देश दुनिया में विरोध और संघर्ष लगातार होता रहेगा ज्योतिषाचार्य पं आनंद शंकर व्यास द्वारा 120 वर्ष पुराने हस्त लिखित पंचांग से तैयार किए गए संवत्सर 2075 के श्री महाकाल पंचांग के अनुसार वर्ष 2018 में ग्रहयोग कुछ ऐसे बन रहे है जो देश में कोहराम मचा सकते है। पं व्यास ने बताया कि विरोधकृत वर्ष नाम ही परस्पर विरोध व संघर्ष का संदेश दे रहा है।

विरोध वर्ष में परस्पर विरोधी नेतृत्व रवि और शनि का होने से सर्वत्र संघर्ष व कष्ट का वातावरण निर्मित हो सकता हैं। इस पुरे वर्ष भारतीय सीमा पर शत्रु राष्ट्रों का उन्माद बढ़ेगा। सत्ता विपक्ष के उग्र व हिंसक संघर्ष व आंदोलन प्रदर्शन विशेष रूप से होंगे। इतना ही नहीं इसी बीच विश्व युद्ध की भी संभावनाए बन सकती हैं। विक्रम संवत को नव संवत्सर भी कहा जाता है। संवत्सर पांच तरह का होता है जिसमें सौर, चंद्र, नक्षत्र, सावन और अधिमास आते हैं। विक्रम संवत में यह सब शामिल रहते हैं। हालांकि विक्रमी संवत के उद्भव को लेकर विद्वान एकमत नहीं हैं,लेकिन अधितर 57 ईसवीं पूर्व ही इसकी शुरुआत मानते हैं।

विक्रम सवंत की कुछ रोचक बातें 
सौर वर्ष के महीने 12 राशियों के नाम पर हैं इसका आरंभ मेष राशि में सूर्य की संक्राति से होता है। यह 365 दिनों का होता है। वहीं चंद्र वर्ष के मास चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ आदि हैं इन महीनों का नाम नक्षत्रों के आधार पर रखा गया है। चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है इसी कारण जो बढ़े हुए दस दिन होते हैं वे चंद्रमास ही माने जाते हैं लेकिन दिन बढ़ने के कारण इन्हें अधिमास कहा जाता है। नक्षत्रों की संख्या 27 है, इस प्रकार एक नक्षत्र मास भी 27 दिन का ही माना जाता है। वहीं सावन वर्ष की अवधि लगभग 360 दिन की होती है। इसमें हर महीना 30 दिन का होता है।

सप्तर्षि संवत है सबसे प्राचीन
पं दयानंद शास्त्री ने बताया कि विक्रमी संवत से भी पहले लगभग सड़सठ सौ ई.पू. हिंदूओं का प्राचीन सप्तर्षि संवत अस्तित्व में आ चुका था। हालांकि इसकी विधिवत शुरूआत लगभग इक्कतीस सौ ई. पू. मानी जाती है। इसके अलावा इसी दौर में भगवान श्री कृष्ण के जन्म से कृष्ण कैलेंडर की शुरुआत भी बताई जाती है। तत्पश्चात कलियुगी संवत की शुरुआत भी हुई। 

अगली खबर में राशि अनुसार पढ़े विरोधकृत सवंत्सर का कैसा पढ़ेगा आपके जीवन पर प्रभाव.. 

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