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ये किसान छाछ को सड़ाकर खेत में करता है छिड़काव

जैविक खाद और कीटनाशक बनाने के है अपने फार्मूले
6 लाख रूपए का शुद्ध हो चुका हैं मुनाफा
खराब अनार से बनाया कीटनाशक
खरगोन. पुष्पेंद्र वास्कले. खरगोन से 25 किमी. दूर स्थित मोठापुरा के किसान  ओमप्रकाश मांगीलाल पाटीदार अपने अनार के बगीचें में कोई कीट या फलछेदक कीड़ा लगता है तो वो छाछ को सड़ाकर शाम के समय छिड़काव करते है। उनका कहना है कि किसानों को कीट पतंगों या फलछेदक कीड़ों को मारने का प्रयास नहीं, बल्कि उन्हें भगाने का प्रयास करना चाहिए।

पाटीदार कहते है कि पेस्टीसाइड्स का उपयोग हानिकारक कीटों के साथ-साथ जरूरी कीटों को भी मार देता है। पाटीदार ने स्वयं कार्य करते हुए अपने अनार के बगीचें को पूर्ण जैविक बगीचा बना लिया है। पाटीदार खाद भी अपने ही एक फार्मूलें पर तैयार करते है। वर्ष 2011-12 में राष्ट्रीय कृषि विकास कार्यक्रम के तहत 25350 रूपए के अनुदान पर अनार का फलोद्यान स्वीकृत हुआ। 

जैविक खेती करने की जिद में अनार की फसल में लगने वाले रोग किट और कीड़ों से ओमप्रकाश अनजान थे। वे न तो बीमारी पहचान पा रहे थे और न ही उनके पास कोई उपाय था। तब महाराष्ट्र पुना से संभाजीराव भास्कर विशेषज्ञ को बुलाया। विशेषज्ञ संभाजी राव ने बीमारी तो पहचान ली मगर जैविक उपाय बताने में असफल रहें। इस कारण अनार की पहली उपज बेकार हो गई। ओमप्रकाश को अनार की पहली उपज में लगभग 3 लाख रूपए का नुकसान हुआ। 
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अब ओमप्रकाश स्वयं जैविक उपचार के लिए महाराष्ट्र के पंढरपुर, साकरी, जालना और सताना के कई बगीचों का अवलोकन करने पहुंच गए। अनार में लगने वाली हर प्रकार की बिमारी के बारे में जानकारी हासिल करने लगे, लेकिन उपाय केवल रासायनिक खाद और पेस्टीसाइड्स से ही था। तब उन्होंने भारतीय पद्वति, अधिकारियों और कृषि एंजियों पर विश्वास किया और गोबर, गौमुत्र, सिंगखाद व पंचपत्तियों से बनाए कीटनाशक का उपयोग किया। 

जैविक उपचार के बाद सरकोस्पोरा व अल्टरनेरिया जैसे फुल और फलछेदक कीट भगाने में सफल हुए। इस बार ओमप्रकाश ने अपने बगीचे में पुरी तरह जैविक आधारित अनार उपजाएं। अब ओमप्रकाश के सामने पानी की समस्या सामने आ खड़ी हुई, तब कृषि विभाग से 90 हजार रूपए के अनुदान पर बलराम तालाब व उद्यानिकी विभाग से 1 लाख 32 हजार 826 रूपए का पौधों के लिए प्लॉस्टिक स्वीकृत प्रदान किया गया। इसके बाद ओमप्रकाश ने 2 बार अनार की उपज से लगभग 6 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा लिया।  

खराब अनार से कीटनाशक बनाया
ओमप्रकाश के पास जैविक खाद और कीटनाशक बनाने के अपने फार्मूले है। वे अपने ही फार्मूले से प्राकृतिक रूप से खाद, कीटनाशक और टॉनिक बनाने पर विश्वास करते है। उनकी अनार की पहली फसल खराब हुई। खराब अनार, नीम, अकाव, बेशरम, धतुरा, सीताफल, रतनजोत, प्याज लहसुन और मिर्च से कीट व रोग नियंत्रक बनाते है। इसी तरह सोयाबीन, गुड़, सुरजना की पत्ती महुआ और पके खराब केले से टॉनिक तैयार करते और इनका ही उपयोग करते है। ओमप्रकाश ने पूरी तरह अनार का जैविक बगीचा बनाकर अत्यंत खुश है और अपनी कमाई से भी संतुष्ट है। उन्होंने बगीचे के लिए जिस तरह का अनुभव किया है वह उनके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हुआ है। 
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