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जगन्नाथ अष्टकम नृत्य से रंगमय होता उत्तराधिकार का मंच

विचित्र ​वीणा वादन में दी राग-भूप की प्रस्तुति
जगन्नाथ अष्टकम से की आराधना
मंगला प्रसाद द्वारा लिखित है जगन्नाथ अष्टकम
भोपाल. मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में परम्परा, नवप्रयोगों एवं नवांकुरों के लिए स्थापित श्रृंखला  उत्तराधिकार में  रविवार को विचित्र वीणा वादन एवं ओडिसी समूह नृत्य की प्रस्तुतियां संग्रहालय सभागार में हुईं।
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प्रथम प्रस्तुति में उस्ताद जिया फरीदउद्दीन डागर की शिष्या पद्मजा विश्वरूप, (ग्वालियर) ने अपने साथी कलाकारों के साथ विचित्र वीणा वादन की शुरुआत राग-भूप से की, जिसमें सर्वप्रथम आलाप-जोड़-झाला 
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तत्पश्चात डागर घराने की परंपरागत बंदिश शंकर सूत गणेश विघ्न विनासन गवरी नंदन ताल-सुलताल में निबद्ध प्रस्तुत किया। संगतकारों में पद्मजा विश्वरूप का साथ गिटार पर रजत संदीप गोरे ने, तबले पर विनय बिंदे ने और पखावज पर जयवंत गायकवाड ने दिया।
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 दूसरी प्रस्तुति में गुरु माया धर राउत की शिष्या संचिता भट्टाचार्य, (कोलकाता) ने अपनी शिष्याओं के साथ ओडिसी  समूह नृत्य की शुरुआत जगन्नाथ अष्टकम पर नृत्य प्रस्तुत कर की। जगन्नाथ अष्टकम मंगला प्रसाद द्वारा लिखित है। इसके पश्चात क्रमशः अहिल्या, नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, अष्टपदी और अंत में मोक्ष प्राप्ति एवं दुर्गा पर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मन्त्र मुग्ध कर दिया।    
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आपको बता दे कि संचिता भट्टाचार्य ने ओडिसी नृत्य की शिक्षा गुरु माया धर राउत और गुरु केलु चरण महापात्र से प्राप्त की। संचिता भट्टाचार्य को कई सम्मानों एवं पुरस्कार से नवाजा जा चूका है, जिसमे प्रमुख हैं- कल्पतरु अवार्ड-दिल्ली-2000, कोल्कता गोरव सम्मान(2007) इंडिया प्रेस और महारी अवार्ड 2018 आदि से सम्मानित किया जा चूका है।  संचिता भट्टाचार्य देश ही नहीं विदेशों में भी कई कला मंचों पर ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दे चुकी हैं 

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