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रामचरित मानस सुनना ही सबसे बड़ी साधना

मनुष्य जीवन का उद्देश्य जगदीश को प्राप्त करना है
ग्यारह मुखी हनुमान कवच रूद्र महायज्ञ हुआ प्रारंभ
शिव पार्वती थे श्री रामकथा के प्रथम श्रोता
उज्जैन. रामचरित मानस सुनना ही सबसे बड़ी साधना है। जो सुनेगा वही समझेगा, जो समझेगा वह जीवन धन्य कर लेगा और मोक्ष प्राप्त करेगा। मनुष्य जीवन का उद्देश्य जगदीश को प्राप्त करना है परंतु मनुष्य इस जग में धनलोभ, काम, क्रोध, स्वार्थ में जीवन जीने लगता है और जगदीश को प्राप्त करना भूल जाता है। 
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उक्त बात विश्व विराट मानव कल्याण सेवा चेरीटेबल ट्रस्ट गुजरात के तत्वावधान में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महावीर दास महाराज के सानिध्य में 14 अप्रैल से गयाकोटा सप्तऋषि मंदिर के पास इंदिरानगर में प्रारंभ हुए ग्यारह मुखी हनुमान कवच रूद्र महायज्ञ एवं श्री राम कथा में सिद्ध बाबा नरसिंह दास महाराज ने कही। आयोजन समिति के अजीत मंगलम ने बताया कि प्रारंभ में प्रथम दिवस व्यासपीठ पर विराजमान कथाव्यास श्री श्री 1008 महाराज श्री का पूजन एवं आरती रवि राय, रेखा राय, रिको राय एवं कथा के मुख्य यजमान हरिसिंह यादव ने की। 
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कथा में सिद्ध बाबा नरसिंह दास महाराज ने कहा कि रामकथा के प्रथम वक्ता भगवान शिव तथा प्रथम श्रोता माता पार्वती थी, द्वितीय वक्ता कागभुष महाराज तथा श्रोता गंगा, जमुना, सरस्वती नदियां थी। प्रथम लेखक वाल्मिकी महाराज जिन्होंने संस्कृत भाषा में लिखी तथा द्वितीय लेखक गोस्वामी तुलसीदास जिन्होंने सरल भाषा हिंदी में लिखा। कथा में प्रमुख रूप से दिनेश पंड्या एडव्होकेट, अनंतनारायण मीणा, ललित मीणा, जानकीलाल परमार, पं. नितीन शर्मा, पिंटू ठाकुर, चेतन आर्य, प्रवीण कुशवाह, अरविंद व्यास आदि उपस्थित थे।  

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