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जय परशुराम का उद्घोष करते लहराए 2100 केसरिया ध्वज

महाकाल के दरबार से निकली परशुराम दर्शन यात्रा
यात्रा में सम्मिलित हुए 10 हजार ब्रह्मजन
परशुराम दर्शन यात्रा ये रही विशेषताएं
उज्जैन. श्री परशुराम जयंती महापर्व अक्षय तृतीया पर सुबह 9 बजे बाबा महाकाल के प्रांगण से श्री परशुराम युवा ब्राह्मण संगठन द्वारा उज्जैन नगर के समस्त ब्राह्मणों को लेकर श्री परशुराम दर्शन यात्रा विशाल वाहन रैली निकाली गई जिसमें 10 हजार ब्रह्मजन सम्मिलित हुए। 2100 केसरिया ध्वज लहराते निकले ब्रह्मजनों ने शहर को जय परशुराम के उद्घोषों से गुंजायमान कर दिया। 
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पं. श्रवण शर्मा एवं पार्षद माया राजेश त्रिवेदी ने बताया कि प्रारंभ में भगवान श्री परशुरामजी का बाबा महाकाल के साथ अभिषेक पूजन पं. शैलेन्द्र शर्मा व पं. महेश पुजारी के आचार्यत्व में हुआ। परशुरामजी की आरती पं. अखिलेश महाराज, पं. महेश पुजारी, पं. जॉनी गुरू, पं. श्यामनारायण व्यास, पं. वासुदेव शास्त्री, पं. बुध्दिप्रकाश शास्त्री, पं. महेन्द्रदत्त शास्त्री के साथ समाज के वरिष्ठजनों ने की। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष पं. राजेश त्रिवेदी, अध्यक्ष पं. गिरीश पाठक, पं. देवेन्द्र पुरोहित, पं. यशवंत व्यास, पं. विजय व्यास, पं. हेमंत व्यास, पं. भगवान शर्मा, पं. राजेश पुजारी, पं. प्रशांत पुजारी, पं. अर्पित दुबे, पं. पंकज दुबे, पं. रूपम व्यास, पं. संजय जोशी, पं. राकेश शर्मा, पं. निरंजन मेहता, पं. गोकुल शर्मा के संचालन में रैली प्रारंभ हुई। 
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श्री परशुराम दर्शन यात्रा में समाज के अध्यक्षगण नारायण शर्मा, पं. शिवनारायण शर्मा, पं. अभय मराठे,पं. रवि शुक्ला रैली में साथ चले। महिलाओं में संध्या पंड्या, शीला पाठक, तरूणा जोशी, रेखा शर्मा, रेणु वशिष्ठ, कीर्ति मोढ़, कामिनी जोशी, प्रेरणा मनाना, अंजना शुक्ला आदि उपस्थित थीं। ब्रह्मजनों का स्वागत संस्थापक अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने किया एवं आभार संगठन के अध्यक्ष गिरीश पाठक ने माना। 
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परशुराम दर्शन यात्रा ये रही कुछ विशेषताएं
परशुराम दर्शन यात्रा में महिलाएं साफा बांधकर दो पहिया वाहनों पर सवार होकर फर्शा लहराती निकली। 
महिलाएं यात्रा मार्ग में हाथों में तख्तियां लहराती निकली जिस पर लिखा था सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा अब गोविंद नहीं आएंगे।
यात्रा में युवा परशुरामजी का फर्शा लिये हुए थे तो कुछ युवा परशुराम के वेश में आए थे। 
यात्रा टॉवर पर पहुंची जहां देश की एकता, अखंडता, सद्भावना के लिए ब्रह्म श्रृंखला बनाई गई। 
रैली का चाणक्यपुरी स्थित परशुराम मंदिर पहुंची जहां महाआरती के पश्चात यात्रा का समापन हुआ। 

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