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मलखम्ब के साथ योगमय हुआ विराट गुरुकुल सम्मेलन का मंच

गायत्री मंत्र के स्वरों के साथ योगकला का प्रदर्शन
दुर्गा स्तुति के साथ मलखम्ब की प्रस्तुति
दर्शकों मे असीम आनंद की अनुभूति
उज्जैन. नीरज थोरात. शिक्षा और साक्षरता दो भिन्न शब्द हैं, और दोनों के शाब्दिशक एवम व्यावहारिक अर्थ भी पृथक हैं। वर्तमान मे प्रचलित शैक्षणिक व्यवस्था को केवल पुस्तकीय ज्ञान एवं परीक्षाओं मे श्रेष्ठ प्रदर्शन से ही जोड़कर देखा जाता है। 
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वहीँ अगर हम भारतवर्ष की प्राचीन गुरुकुल परम्परा की बात करें, तो अध्यापन सिर्फ साक्षरता न होकर गुरुशिष्य परम्परा का वहन करते हुए सम्पूर्ण शिक्षा का संचार करना होता था। भारतवर्ष मे लगभग 7 लाख 20 हज़ार गुरुकुल थे।

उज्जैन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय विराट गुरुकुल सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत महाराष्ट्र और राजस्थान सहित विभिन्न प्रान्तों के गुरुकुलों से आये हुए छात्र छात्राओं ने शारीरिक व्यायाम, योग एवं मलखम्ब के प्रदर्शन से हुई। 
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बालक बालिकाओं के इस शारिरिक प्रदर्शन ने सभामण्डप मे उपस्थित सभी दर्शकों को बार बार तालियां बजाने पर विवश किया। 

आपको बता दे कि तीन दिवसीय सम्मेलन में देश विदेश से आए गुरु और उनके शिक्षयों ने प्रस्तुति दी। वहीं सुबह वैदिक मंत्रों के साथ वेद विद्या प्रतिष्ठान का आंगन सराबोर होता रहा। 

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