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गुरुकुल सम्मेलन में संगीतमय मलखंब और तीरंदाजी का प्रदर्शन

शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति से रंगमय हुआ मंच
प्राचीनतम युद्ध कला का हुआ प्रदर्शन
प्राचीन कला कलारी पयट्टू की प्रस्तुति
उज्जैन.अंतरराष्ट्रीय विराट गुरुकुल सम्मेलन के तीसरे व अंतिम दिन के प्रथमचरण की शुरूआत सांस्कृतिक एवं शारीरिक प्रस्तुतियों से हुई। आयोजन स्थल पर बने विशाल मंच पर बालिकाओं ने पारम्परिक वेशभूषा में शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। 
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नृत्यांगनाओं की प्रस्तुति में लय और ताल के साथ उनकी भावभंगिमाएँ प्रशंसनीय रही। द्वितीय प्रस्तुति में महाराष्ट्र से आए गुरुकुल के छात्रों द्वारा रोप मलखम्ब व पोल मलखम्ब की प्रस्तुति हुई। संगीत की ऊर्जावान धुनों पर किशोरों के प्रभावी प्रदर्शन ने पांडाल में मौजूद सभी दर्शकों को दाँतों तले उंगली दबाने पर विवश कर दिया। मलखम्ब की इस प्रस्तुति को दर्शकों द्वारा करतल ध्वनि से सराहा गया।
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दक्षिण भारत से आए गुरुकुलों के विद्यार्थियों ने भारत की प्राचीनतम युद्ध कला(मार्शल आर्ट) का प्रदर्शन किया। हमने जब विस्तार से इस कला के बारे में जानकारी ली,तो यह पाया कि कलारी पयट्टू एक बेहद प्राचीन कला हैं। पारंपरिक तौर पर माना जाता है,कि इसकी उत्पत्ति स्वयं भगवान द्वारा की गई है। लेकिन भारतीय संस्कृति के कई अन्य आयामों की तरह यह असाधारण मार्शल आर्ट भी किसी और की नहीं, बल्कि अगस्त्य मुनि की देन है। 
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चतुर्थ प्रस्तुति में दो बालकों द्वारा तीरंदाजी का प्रदर्शन किया। इतनी कम आयु में तीरंदाजी पर ईनकी जो पकड़ थी, विश्वास कीजिए वह किसी भी दक्ष तीरंदाज़ से कम नही थी। आपको बता दे की विराट गुरुकुल सम्मेलन में सोमवार शाम को संकल्प पत्र वाचन के साथ समापन किया जाएगा। 

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