Top Connect

क्या आपको पता है कौन है आपके इष्ट देव ?

कुंडली के अनुसार जाने अपने इष्ट देव
ये ग्रह ही आपके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
पंचम भाव में स्थित ग्रह के आधार पर इष्ट देव
उज्जैन. संसार का प्रत्येक जीव समय के साथ ही अपने गण लेकर पैदा होता है। जो जिसका गण होता है उसी के अनुसार व्यक्ति के इष्ट को समझा जाता है। जन्म कुंडली में बारह राशियां हैं,और लग्न में जो राशि होती है उस राशि का मालिक ही व्यक्ति के गण का मालिक होता है। मालिक के गण का प्रमुख देवता कौन सा है वह अपने अपने धर्म के अनुसार ही माना जाता है। शास्त्रों की मान्यतानुसार अपने इष्ट देव की आराधना करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित  दयानन्द शास्त्री के अनुसार आराध्य इष्ट देव कौन से होंगे इसे आप अपनी जन्म की तारीख,बोलते नाम की राशि या अपनी जन्म कुंडली की लग्न राशि के अनुसार जान सकते हैं।

किसी जातक की कुंडली से इष्ट देव जानने के अलग अलग सूत्र व सिद्धांत समय समय पर ऋषि मुनियों ने बताए व सम्पादित किए हैं।  जेमिनी सूत्र के रचयिता महर्षि जेमिनी इष्टदेव के निर्धारण में आत्मकारक ग्रह की भूमिका को सबसे अधिक मह्त्व्यपूर्ण बताया है। कुंडली में लग्न,लग्नेश,लग्न नक्षत्र के स्वामी एवं ग्रह जो सबसे अधिक अंश में हो चाहे किसी भी राशि में हो आत्मकारक ग्रह माने जाते है। 
15260046570.jpeg

इष्टदेव कैसे दिलाते हैं सफलता
देवी देवता हमें कैसे लाभ अथवा सफलता दिलाते हैं वस्तुतः जब हम किसी भी देवी-देवता की पूजा करते है तो हम अपने अभीष्ट देवी देवता को मंत्र के माध्यम से अपने पास बुलाते है और आवाहन करने पर देवी देवता उस स्थान विशेष तथा हमारे शरीर में आकर विराजमान होते है। वास्तव में सभी देवी शक्तियां अलग-अलग निश्चित चक्र में हमारे शरीर में पहले से ही विराजमान होती है आप हम पूजा अर्चना के माध्यम से ब्रह्माण्ड में उपस्थित देव शक्ति को अपने शरीर में धारण कर शरीर में पहले से विद्यमान शक्तियों को सक्रिय कर देते है और इस प्रकार से शरीर में पहले से स्थित ऊर्जा जाग्रत होकर अधिक क्रियाशील हो जाती है। इसके बाद हमें सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है।

ऐसे करें अपने इष्टदेव की पहचान
आत्मकारक ग्रह के अनुसार ही इष्ट देव का निर्धारण व उनकी अराधना करनी चाहिए। भक्ति और आध्यात्म से जुड़े अधिकांश लोगों के मन में हमेशा यह प्रश्न उठते रहता है मेरा ईष्टदेव कौन है और हमें किस देवता की पूजा अर्चना करनी चाहिए। कुछ लोगों प्रिय शिव जी हैं तो किसी के विष्णु तो किसी के राधा कृष्ण। जैसा की आपको पता है कि अपने अभीष्ट देवता की साधना तथा पूजा अर्चना करने से हमें शीघ्र ही मन चाहे फल की प्राप्ति होती है। ईष्टदेव को जानने की विधियों में भी विद्वानों में एक मत नहीं है। कुछ लोग नवम् भाव और उस भाव से सम्बन्धित राशि तथा राशि के स्वामी के आधार पर ईष्टदेव का निर्धारण करते है। वही कुछ लोग पंचम भाव और उस भाव से सम्बन्धित राशि तथा राशि के स्वामी के आधार पर ईष्टदेव का निर्धारण करते है। कुछ विद्वान लग्न लग्नेश तथा लग्न राशि के आधार पर इष्टदेव का निर्धारण करते है। त्रिकोण भाव में सर्वाधिक बलि ग्रह के अनुसार भी इष्टदेव का चयन किया जाता है। महर्षि जैमिनी जैसे विद्वान के अनुसार कुंडली में आत्मकारक ग्रह के आधार पर इष्टदेव का निर्धारण करना चाहिए। अब प्रश्न उठता है कि कुंडली में आत्मकारक ग्रह का निर्धारण कैसे होता है ? महर्षि जेमिनी के अनुसार जन्मकुंडली में स्थित नौ ग्रहों में जो ग्रह सबसे अधिक अंश पर होता है चाहे वह किसी भी राशि में कयों न हो वह आत्मकारक ग्रह होता है।

पंचम भाव में स्थित ग्रह के आधार पर इष्ट देव का चयन
सूर्य-            विष्णु तथा राम
चन्द्र-          शिव, पार्वती, कृष्ण
मंगल-         हनुमान, कार्तिकेय, स्कन्द,
बुध-             दुर्गा, गणेश,
वृहस्पति-    ब्रह्मा, विष्णु, वामन
शुक्र-           लक्ष्मी, मां गौरी
शनि-           भैरव, यम, हनुमान, कुर्म,
राहु-             सरस्वती, शेषनाग, भैरव
केतु-            गणेश, मत्स्य

पंचम भाव में स्थित राशि के आधार इष्टदेव का निर्धारण
मेष:           सूर्य, विष्णुजी
वृष:            गणेशजी।
मिथुन:       सरस्वती, तारा, लक्ष्मी।
कर्क:           हनुमानजी।
सिह:           शिवजी।
कन्या:        भैरव, हनुमानजी, काली।
तुला:           भैरव, हनुमानजी, काली।
वृश्चिक:      शिवजी।
धनु:            हनुमानजी।
मकर:          सरस्वती, तारा, लक्ष्मी।
कुंभ:            गणेशजी।
मीन:            दुर्गा, सीता या कोई देवी।
15260046571.jpeg
जन्म माह के आधार पर इष्ट 
जिन्हें केवल जन्म माह ज्ञात है, उनके लिए इष्ट देव इस प्रकार होंगे- जिनका जन्म जनवरी या नवंबर माह में हुआ हो वे शिव या गणेश की पूजा करें। फरवरी में जन्मे शिव की उपासना करें। मार्च व दिसंबर में जन्मे व्यक्ति विष्णु की साधना करें। अप्रेल, सितंबर, अक्टूबर में जन्मे व्यक्ति गणेशजी की पूजा करें। मई व जून माह में जन्मे व्यक्ति मां भगवती की पूजा करें। जुलाई माह में जन्मे व्यक्ति विष्णु व गणेश का घ्यान करें।

जन्म वार के आधार पर ये होंगे इष्ट देव
जिनको वार का पता हो, परंतु समय का पता न हो, तो वार के अनुसार इष्ट देव इस प्रकार होंगे। रविवार- विष्णु सोमवार- शिवजी। मंगलवार- हनुमानजी बुधवार- गणेशजी गुरूवार- शिवजी शुक्रवार- देवी
शनिवार- भैरवजी।

लग्नानुसार ये होंगे आपके इष्ट देव 

मेष लग्न: सूर्य देवता, गायत्री देवी आपके इष्ट है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

वृषभ लग्न: बुध देवता, गणेश जी आपके इष्ट है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

मिथुन लग्न: शुक्र देवता , माँ दुर्गा आपके इष्ट है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

कर्क लग्न: मंगल देवता , हनुमान जी आपके इष्ट देव है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

सिंह लग्न: देव गुरु बृहस्पति, विष्णु जी आपके इष्ट देव है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

कन्या लग्न: शनि देवता, शिव जी आपके इष्ट देव है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

तुला लग्न: शनि देवता, शिव जी आपके इष्ट देव है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

वृश्चिक लग्न: देव गुरु बृहस्पति, विष्णु जी आपके इष्ट देव है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

धनु लग्न: मंगल देवता, हनुमान जी आपके इष्ट देव है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

मकर लग्न: शुक्र देवता , माँ दुर्गा आपके इष्ट है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

कुम्भ लग्न: बुध देवता, गणेश जी आपके इष्ट है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

मीन लग्न: चंद्र देवता, शिव जी आपके इष्ट देव है उनका मंत्र , पूजन , पाठ आरती आपके लिए सदैव लाभकारी रहेगी।

इस तरह अपने सही इष्ट को पहचान कर उसकी नित्य आराधना करने वाले को… आरोग्य, सौभाग्य, सम्मान, इष्टवल, एवं योग्यता की प्राप्ती होती है।

ये ग्रह ही आपके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है 

1. सूर्य- सूर्य आपके आत्म्कारक ग्रह हैं तो भगवान विष्णु और उनके अवतार भगवान राम आपके ईष्ट देवता होंगे।
2.चंद्रमा- भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान कृष्ण ईष्ट देव होंगे।
3.मंगल- मंगल आत्म्कारक ग्रह होने पर हनुमान, भगवान कार्तिकेय और नरसिंह भगवान आपके ईष्टदेवता होंगे।
4. बुध- भगवान गणेश और माता दुर्गा आपके ईष्ट देव होंगे।
5. बृहस्पति- भगवान विष्णु और उनके वामन अवतार आपके ईष्ट देवता होंगे अगर बृहस्पति आपके आत्म्कारक ग्रह हैं।
6. शुक्र- माता लक्ष्मी और परशुराम अवतार आपके ईष्ट देवता होंगे।
7.शनि- भैरव, यमराज, कुर्मावतार और हनुमान जी आपके ईष्ट देवता होंगे।
8.राहु- माता सरस्वती और शेषनाग आपके ईष्ट देवता होंगे।
9. केतु- भगवान गणेश और मत्स्य अवतार आपके ईष्ट देवता होंगे।

Latest News

Top Trending

Connected astro

  • Astrologer connect


  • Mangalam Chmaber Main Market Kota