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कंस राक्षस था फिर भी उसने भ्रूण हत्या नहीं की

भ्रूण हत्या कर हम स्वयं अल्पसंख्यक बनते जा रहे
कालांतर में और भी बुरा समय आने वाला है
भारत राष्ट्र को माताएं ही बचा सकती हैं
उज्जैन. कंस जैसे राक्षस ने भी गर्भ नहीं गिराया। मृत्यु का भय होने के बावजूद उस कंश जैसे राक्षस ने पैदा होने के बाद वध किया। भ्रूण हत्या पाप है, हम स्वयं ही अपने हाथों से भ्रूण हत्या कर अल्पसंख्यक बनते जा रहे हैं। हमारे हाथ से भौगोलिक स्थिति बिगड़ रही है। कालांतर में और भी बुरा समय आने वाला है। सनातन धर्म एवं भारत राष्ट्र को माताएं ही बचा सकती हैं। 
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उक्त बात महामृत्युंजय धाम के पास महेश विहार कॉलोनी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में भगवान कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर पं. बालकृष्ण कौशिक राजस्थानवालों ने कही। महेन्द्र कटियार के अनुसार कथा के मुख्य यजमान पं. रमण त्रिवेदी, निर्मला देवी, रमण गुरू, दिनेश गुरू, उमेश गुरू, संदीप गुरू, गोपाल गुरू, अमित उपाध्याय हैं।
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महामृत्युंजय धाम में भगवान गणेश, पार्वती, कार्तिक स्वामी, नंदी, भगवान शिव, वीरभद्र, दुर्गा की विशाल प्रतिमा, हनुमानजी की प्रतिमा एवं इच्छापूर्ण बालाजी की विशाल प्रतिमा, शिव परिवार की विशाल प्रतिमा जिसमें भगवान शिव माता पार्वती के साथ भगवान गणेश एवं कार्तिक को लिये हुए हैं। इन सभी प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। समाजसेवी सत्यनारायण जायसवाल सहपत्निक नित्यप्रति चार घंटे का अनुष्ठान कर रहे हैं। कथा का प्रारंभ उर्जा मंत्री पारस जैन द्वारा 9 मई को किया गया था। 10 मई को अनिल फिरोजिया ने आरती की एवं 11 एवं 12 को कॉलोनीवासियों ने आरती की। 

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