Top Connect

कथकली में दिखा महाभारत की कथा का दृश्य

सारंगी की जुगलबंदी के साथ कथकली नृत्य
राग मधुवंती से हुई जुगलबंदी की शुरूआत
शिकारी के रूप में अर्जुन के पास पहुंच शिव
भोपाल. मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में परम्परा, नवप्रयोगों एवं नवांकुरों के लिए स्थापित श्रृंखला उत्तराधिका  में रविवार को गायन-सारंगी जुगलबंदी एवं कथकली नृत्य की प्रस्तुतियाँ संग्रहालय के सभागार में हुईं। पहली प्रस्तुति में गायक उस्ताद छुट्टू हुसैन खां एवं उस्ताद नज़र हुसैन खां के शिष्य ज़मीर हुसैन खां एवं शिराज हुसैन खां ने गायन-सारंगी जुगलबंदी की शुरूआत राग मधुवंती बड़ा ख्याल विलंबित एक ताल द्रुत तीन ताल में निबध तौर गुन गाँऊ और कैसे कटे बिरहा की रैन मोपे प्रस्तुत कर की।
15262338110.jpeg
राग मधुवंती के बाद राग देस में कर्म कर दी जैं बंदिश प्रस्तुत की। ज़मीर हुसैन खां एवं शिराज हुसैन खां ने अपनी प्रस्तुति का अंत राग पिलू में दादरा बरसन लागी सावन बुंदियाँ राजा प्रस्तुत कर की। संगतकारों में तबले पर मो. नईम ने साथ दिया।  
15262338111.jpeg
सारंगी की जुगलबंदी के बाद  कलामंडलम् एम.पी. शंकरण नाम्बूथिरी एवं कलामंडलम् गोपालकृष्णन के शिष्य कलामंडलम् प्रसोभ ने अपने साथी कलाकारों के साथ महाभारत की एक कथा पर कथकली नृत्य प्रस्तुत किया। जिसमें अर्जुन पाशुपत अस्त्र के लिए वन में शिव की तपस्या कर रहे हैं। 
15262338112.jpeg
शव और पार्वती शिकारी का रूप धारण कर अर्जुन की परीक्षा लेने पहुँचते हैं, परन्तु उसी समय दुर्योधन मूकासुर नामक राक्षस को सूअर का रूप धारण कर अर्जुन को मारने भेजता है। शिकारी(शिव) अर्जुन के पास पहुँचते हैं, उसी समय सूअर भी अर्जुन वध के लिए पहुँचता है। अर्जुन और शिकारी(शिव) दोनों तीर से सूअर की तरफ प्रहार  करते हैं, परन्तु शिकारी(शिव) सूअर को मार देता है। 
15262338113.jpeg
अतः अर्जुन और शिकारी(शिव) में युद्ध प्रारंभ होता है और शिकारी की विजय होती है। पराजय के पश्चात् अर्जुन मिट्टी के शिव लिंग बनाते हैं और बेलपत्र अर्पित करते हैं। अंत में अर्जुन आश्चर्य चकित होते हैं, जब वह शिकारी के सर पर अपने द्वारा अर्पित बेलपत्र को देखते हैं, अर्जुन क्षमा मांगने लगते हैं। अतः शिव अपने वास्तविक स्वरुप में आकर अर्जुन को पाशुपत अस्त्र देते हैं और कैलाश लौट जाते हैं।
15262338114.jpeg
 कथकली नृत्य प्रस्तुति तीन भागों में विभक्त थी, पहले चरण में अर्जुन को तपस्या करते दिखाया गया। दुसरे चरण में शिव का शिकारी रूप धारण कर वन में आना और तीसरे चरण में अर्जुन- शिकारी के मध्य युद्ध एवं अर्जुन को शिव द्वारा पाशुपत अस्त्र आशीर्वाद स्वरुप मिलना दर्शाया गया है। 
15262338115.jpeg
नृत्य प्रस्तुति में कलामंडलम्प्रसोभ, जगदीप दिनेश, आदर्श, अश्विन ने मंच पर अपने नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य प्रस्तुति के दौरान गायन में कलामंडलम् मनोज नाम्बूथिरी और रंजित नाम्बूथिरी ने, मधलम(पारंपरिक ड्रम) पर कलामंडलम् अरुण ने, चेंडा(पारंपरिक ड्रम) पर कलामंडलम् सनूप ने और मेकअप में लिजेश अशोक ने साथ दिया।
 

 

Latest News

Top Trending

Connected artist

  • Art Connect