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उत्तराधिकार में हुईं मोहन वीणा एवं कथक नृत्य की प्रस्तुतियां

राग दरबारी में शिव के विराट स्वरुप हुआ प्रदर्शन
नृत्य कौशल से ओम शब्द का किया बखान
मुग़ल दरबार को नृत्य स्वरुप में मंच पर किया प्रस्तुत
भोपाल. मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में परम्परा, प्रदर्शनकारी कला एवं नवांकुरों के लिए स्थापित श्रृंखला उत्तराधिकार में रविवार को मोहन वीणा एवं कथक नृत्य की प्रस्तुतियां संग्रहालय के सभागार में हुई।कार्यक्रम की शुरुआत इटावा घराने के उस्ताद शाहिद परवेज़ के शिष्य मनीष पिंगले ने अपने साथी कलाकार के साथ मोहन वीणा वादन से की। 
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मनीष पिंगले ने अपने शिष्य मानस गोसावी के साथ राग श्याम कल्याण में विलम्बित तीन ताल में मोहन वीणा वादन की शुरुआत करते हुए राग श्याम कल्याण में ही द्रुत तीन ताल में वादन प्रस्तुत किया। मनीष पिंगले ने अपनी प्रस्तुति का अंत राग किरवानी केहरवा ताल में वीणा वादन प्रस्तुत कर किया।विणा वादन के पश्चात मधुमिता राय ने अपने साथी कलाकारों के साथ कथक नृत्य की शुरुआत घूमर नृत्य से की। जिसमें शिव के विराट स्वरुप का बखान किया गया। 
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इस प्रस्तुति में ओम शब्द के विराट को संसार के बनने से और अग्नि को ज्ञान से बिम्बित कर नृत्य कौशल से ओम शब्द का बखान किया गया। घूमर नृत्य के बाद कलाकारों ने राग दरबारी में दरबारी प्रस्तुत किया। दरबारी में मुग़ल दरबार को नृत्य स्वरुप में मंच पर प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में मुग़ल दरबार के काम-काज और तौर-तरीकों को प्रस्तुत किया गया।
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मधुमिता राय ने अपनी नृत्य प्रस्तुति का अंत समानुभव प्रस्तुत कर किया। इस प्रस्तुति में लास्य और तांडव नृत्य हुआ। माना जाता है कि तांडव जिस तरह शिव के परिपेक्ष्य में है, उसी प्रकार लास्य माँ पार्वती के संदर्भ में है। साधरणत स्त्रियों का नृत्य ही लास्य कहलाता है। इस प्रस्तुति में मधुमिता राय का साथ मंच पर मोनालिसा कुंडू, नंदिनी चक्रबर्ती, श्रेया आद्या, प्रसनजीत मजूमदार,सुशांत घोष और अमित दास आदि ने अपने नृत्य कौशल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।  

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