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किन्नर अखाड़ा प्रयागराज के कुंभ में करेगा शाही स्नान . लक्ष्मी

किन्नर अखाड़े की आचार्य महामण्डलेश्वर ने की घोषणा
20 नवम्बर को होगा कुंभ मेले में भूमि पूजन
6 जनवरी को धूमधाम से निकलेगी देवत्व यात्रा
प्रयागराज. किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामण्डलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा है कि प्रयागराज में होने जा रहे कुंभ महापर्व में किन्नर अखाड़ा सारे शाही स्नान करेगा। त्रिपाठी ने कहां की हमें अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद या किसी दूसरे अखाड़े से मान्यता लेने की जरूरत नहीं है।

सोमवार को प्रयागराज पहुंची लक्ष्मी नारायण ने कहा, "हम किसी भी स्थिति में अपना सनातन धर्म छोड़ नहीं सकते, किसी के भी दबाव में आकर हम अपने को खत्म नहीं होने देंगे। हम सर्वोच्च न्यायालय से अपना हक पा सकते हैं तब सनातन धर्म में उपदेवता को जो किन्नर हैं, उन्हें किसी की मान्यता की जरूरत नहीं है।

20 नवम्बर को होगा कुंभ मेले में भूमि पूजन
उन्होंने कहा कि तीर्थराज प्रयाग में कुंभ मेले के लिए 20 नवम्बर को भूमि पूजन किया जायेगा जिसके लिए देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में किन्नर अखाडा के महामण्डलेश्वर 19 नवम्बर को यहां पहुंचेंगे। छह जनवरी को देवत्व यात्रा (पेशवाई) धूमधाम से निकाली जायेगी। देवत्व यात्रा अलोपीबाग स्वामी शंकराचार्य वासुदेवानंद आश्रम से विभिन्न मार्गों से होते हुए कुंभ मेला क्षेत्र में पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि किन्नर अखाड़ा कुंभ मेले में शाही स्नान समेत अंतिम स्नान महा शिवरात्रि तक रहकर करेंगे।

दूसरे अखाड़े से मान्यता लेने की जरूरत नहीं है
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा उन्हें मान्यता नहीं देने के सवाल पर उन्होंने बताया है कि किन्नरों की मान्यता उपदेवता के रुप में है और पूरा अखाड़ा श्री विद्या परम्परा का अनुसरण करता है। उन्हें किसी दूसरे अखाड़े से मान्यता लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म में जो आडम्बर है वह दूर होना चाहिए और धर्म के नाम पर लोगों का शोषण भी बन्द होना चाहिए। हिन्दू सनातन धर्म बहुत ही आधुनिक धर्म है और सभी को अपने में समाहित करने की अद्भुद क्षमता भी रखता है।

महामण्डलेश्वर ने कहा कि प्रयागराज में 2019 कुंभ मेले में वह बड़ी संख्या में शामिल होंगे। उनके बारे में जितने भी वाद-विवाद हो रहा है, उसका पटाक्षेप भी हो जायेगा। कुंभ किसी एक व्यक्ति या समुदाय का नहीं है। इसमें सभी शिरकत करने के अधिकारी हैं। उन्होंने कहा," देव दनुज नर किन्नर श्रेनी। सादर मज्जहिं सकल त्रिवेनी।" जब धर्म, शास्त्रों ने किन्नरों को उपदेवता का स्थान दिया है और हमने स्वयं का अपना अखाड़ा स्थापित किया है। हमारे पूर्वजों ने जिस प्रकार से सनातन धर्म का पालन किया है हम भी उसका पालन करेंगे, देवत्व यात्रा निकालेंगे और शाही स्नान (अमृत स्नान) करेंगे।
   
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा वह अगर भवानी या सोनम मेले में यात्रा का अकेले झण्डा लेकर चलेंगे वही पर्याप्त है। नम्बर गेम में हम नहीं हैं। यह काम राजनीतिक पार्टियां करती हैं। यह अखाड़ा ,धर्म क्षेत्र है, यहां चलने वाले पर महत्वता होती है। जिस समय हिन्दू सनातन धर्म का पतन हो रहा था उस समय आदि शंकराचार्य प्रभु अकेले ही निकले थे। उन्हीं से सारी पीठें बनी हैं। उन्हीं के आर्शीवाद से सारे अखाड़े हैं और हम भी अपना अखाड़ा चला रहे हैं।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर उन्होंने बेबाकी से कहा," हाय मेरे राम, मेरे राम को समाज ने राजनीतिक मुद्दा का  बना दिया। हम किस समाज में जीते हैं जो मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के नाम पर राजनीति करते हैं।श्रीराम का मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तब कहां बनेगा। बडे दुर्भाग्य की बात है कि यह मामला उच्चतम न्यायालय में चल रहा है। इसे वहां तक पहुंचना ही नहीं चाहिए था।
 त्रिपाठी ने कहा कि अगर मानस उठाकर पढ़ा जाये तो श्रीराम के लिए किन्नरों से अधिक किसने त्याग किया। श्रीराम के वन गमन के बाद से हमारे ही पूर्वज उनके लौटने तक उसी तट पर उनकी प्रतीक्षा करते रहे। उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़ा श्रद्धा से इस बात पर अटल है श्रीराम मंदिर अयोध्या में ही बनना चाहिए। इसके ऊपर किसी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

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