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10 साल बाद बुध पुष्य नक्षत्र 31 अक्टूबर को प्रदान करेगा समृद्धि

22 घंटे 44 मिनट रहेगा बुध पुष्य नक्षत्र
सोने की खरीदारी का है अधिक महत्व
किस मुहूर्त में क्या खरीदें
उज्जैन. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर साध्य योग के विशेष संयोग में 10 साल बाद पुष्य नक्षत्र का महा संयोग बन रहा है। पंचांग की गणना के अनुसार देखें तो इसी तरह का संयोग अब 7 साल बाद 2025 बनेगा।  पं अमर डब्बावाला के अनुसार इस वर्ष नक्षत्रों के राजा पुष्य का भगवान गणेश के प्रिय बुधवार को आ रहा है जो स्थाई और अस्थाई संपत्ति की खरीदी के लिए मंगलकारी है। पुष्य नक्षत्र की शुरूआत 30 अक्टूबर की रात 3.50 बजे से शुरू होकर 31 अक्टूबर की रात 2.34 बजे तक रहेगा। इस तरह पुष्य नक्षत्र का यह संयोग 22 घंटे 44 मिनट रहेगा।

27 नक्षत्रों में आंठवा स्थान देवता बृहस्पति और स्वामी शनि
पं अमर डब्बावाला के अनुसार 27 नक्षत्रों में बुध नक्षत्र का आंठवा स्थान होता है। इस नक्षत्र में किया गया कोई भी कार्य शुभ और कल्याणकारी होता हैं। पुष्य को नत्रक्षों का राजा भी कहा जाता है। यह नक्षत्र सप्ताह के विभिन्न वारों के साथ मिलकर विशेष योग बनाता है। इन सभी का अपना एक विशेष महत्व होता है। रविवार, बुधवार व गुरुवार को आने वाला पुष्य नक्षत्र अत्यधिक शुभ होता है। ऋग्वेद में इसे मंगलकर्ता, वृद्धिकर्ता, आनंद कर्ता एवं शुभ कहा गया है।
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किस मुहूर्त में क्या खरीदें
लाभ : सुबह 6.32 से 7.56 बजे और शाम 4.20 से 5.43 बजे तक सोना, चांदी रत्नाभूषण,अचल संपत्ति का खरीदना लाभ प्रदान करेगा।
अमृत : सुबह 7.57 से 9.20 बजे और रात 8.59 से 10.32 तक इलेक्ट्रानिक वस्तुएं घर की जरूरत का समाप,वस्त्र आभूषण का खरीदना अमृत प्रदान करेगा।
शुभ : सुबह 4.43 से दोपहर 12.07 बजे तक और रात 7.19 से 8.55 बजे तक अभूषण बहीखाते,वाहन खरीदना शुभ होगा।

जानिए क्यों हें इस दिन सोने की खरीदारी का है अधिक महत्व
पुष्य नक्षत्र में सोने की खरीदारी का अधिक महत्व है। लोग इस दिन सोने इसलिए खरीदते हैं, क्योंकि इसे शुद्ध, पवित्र और अक्षय धातु के रूप में माना जाता है। यह नक्षत्र स्वास्थ्य के लिए भी विशेष महत्व रखता है। पुष्य नक्षत्र पर शुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर यह सेहत संबंधी कई समस्याओं को समाप्त करने में सक्षम होता है।

जानिए क्या करें इस दिन

पुष्य नक्षत्र मां लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय नक्षत्र हैं। इसमें मां लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए अनेक उपाय किए जाते हैं।

इस दिन मुहूर्त में भवन, भूमि, वाहन, आभूषण सहित अन्य खरीदारी करना श्रेष्ठ होता है। इस योग में खरीदी गईं वस्तुएं लंबे समय तक चलती हैं व शुभ फल प्रदान करती हैं।

31 अक्टूबर को प्रात: 6.30 से 9.21 बजे के बीच महालक्ष्मी मंदिर में जाकर देवी को 108 गुलाब के पुष्प अर्पित करें। इससे घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होगा।

पुष्य नक्षत्र में दूध और चावल की खीर बनाकर चांदी के पात्र में लक्ष्मी को भोग लगाने से अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

पुष्य नक्षत्र में श्रीसूक्त के 108 पाठ करने से जीवन के आर्थिक संकटों का नाश होता है और सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है।

वैवाहिक जीवन में सामंजस्य और खुशहाली के लिए पुष्य नक्षत्र में शिव परिवार का विधि-विधान से पूजन करें।

विवाह में बाधा आ रही है तो पुष्य नक्षत्र में बृहस्पति देव के निमित्त कन्याओं को बेसन के लड्डू का वितरण करें।

भगवान श्रीगणेश को 1008 दुर्वांकुर अर्पित करने से सुख-सौभाग्य, वैभव और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

विद्या बुद्धि की प्राप्ति के लिए पुष्य नक्षत्र के दिन चांदी के पात्र से दूध का सेवन करें।

भगवान गणेशजी के दिन बुधवार को पुष्य नक्षत्र के शुभ योग में सोने से निर्मित आभूषण खरीदने से देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और दिवाली तक उनके आगमन का मार्ग प्रशस्त होता है।
 
पुष्य नक्षत्र में चांदी या इससे निर्मित आभूषण, बर्तन, पूजन सामग्री, शुभ प्रतीक आदि खरीदने से घर में बरकत बनी रहती है। आज के दिन पन्ना, हीरा, पुखराज, नीलम, मोती आदि रत्न खरीदने से यह भविष्य में बड़ा लाभ प्रदान करते हैं।

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