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तीन दिवसीय निर्गुण समारोह का हुआ शुभारंभ

कबीर गायन से हुआ संध्या का शुभारंभ
मुबंई के कलाकारों ने दी उपशास्त्रीय गायन की प्रस्तुति
18 जून को नृत्य-नाटिका का होगा मंचन
भोपाल. आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् द्वारा मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में कबीर जयंती के अवसर पर निराकार की संगीत उपासना पर एकाग्र तीन दिवसीय निर्गुण गान समारोह का शुभारम्भ हुआ। 
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शुभारम्भ के बाद अजय टिपाण्या(इंदौर) ने अपने साथी कलाकारों के साथ कबीर गायन प्रस्तुत किया।  जिसमें उन्होंने सर्वप्रथम जेठ मास गर्मी को महीनो प्रस्तुत करते हुए पीले अमीरस धारा गगन में झड़ी लगी और रंग-रंग का फूल खिले रे प्रस्तुत कर सभागार में मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात कलाकारों ने ऐसी मारी प्रीत निभाओ जो और सतगुरु है रंगरेज चुनर मेरी रंग डारी श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके बाद अजय टिपाण्या ने क्रमश तन राम का मंदिर साधु, मेहरम होवे सोई लख पावे और घणा दिन सो लियो रे अब तो जाग मुसाफिर जाग गीत प्रस्तुत किये। अजय टिपाण्या अपने साथी कलाकरों के साथ कहाँ से आया कहाँ जाओगे गीत प्रस्तुत करते हुए अपनी कबीर गायन केंद्रित प्रस्तुति को विराम दिया|
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कबीर गायन के पश्चात आरती अंकलीकर टिकेकर(मुंबई) ने अपने साथी कलाकारों के साथ उपशास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। गायन की शुरआत आरती अंकलीकर टिकेकर ने भजन गुरु बिना कौन बतावे बात प्रस्तुत कर की। इसके बाद घट-घट में पंछी बोलता और तीरथ कौन करे भजन प्रस्तुत कर सभी श्रोताओं को कलाकरों ने अपने गायन-वादन कौशल से मंत्रमुग्ध कर दिया। आरती अंकलीकर टिकेकर ने अपने साथी कलाकरों के साथ चादर हो गई बहुत पुरानी और मन लागो यार फकीरी में भजन प्रस्तुत करते हुए अपनी गायन प्रस्तुति को विराम दिया। 

निर्गुण गान समारोह के दूसरे दिन 18 जून को रंजना गोहर(दिल्ली) के निर्देशन में  नृत्य-नाटिका खुद में कबीर......कबीर में हम का मंचन संग्रहालय सभागार में होगा। समारोह के अंतिम दिन 19 जून को संजय उपाध्याय(पटना) के निर्देशन में नाटक गगन घटा गहरानी का मंचन संग्रहालय सभागार में होगा।       




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