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छः दिवसीय धरोहर समारोह में आज हुईं विभिन्न जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुतियाँ

डिंडोरी के कलाकारों ने दी सैला नृत्य की प्रस्तुति
हरदा के कलाकारों ने दी गदली नृत्य की प्रस्तुति
सोमनाथ के कलाकरों ने दी गदली नृत्य की प्रस्तुति
भोपाल. मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में जनजातीय नृत्यों एवं पारम्परिक व्यंजनों पर एकाग्र धरोहर समारोह में आज मध्यप्रदेश और गुजरात के जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम की श्रृंखला में रुपसिंह कुशराम डिंडौरी ने अपने साथी कलाकारों के साथ गोंड जनजाति का सैला नृत्य दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। गौरतलब है कि सैला नृत्य शरद ऋतु की चांदनी रातों में किया जाता है। हाथों में लगभग सवा हाथ के डंडे के कारण इसका नाम सैला पड़ा। इस नृत्य को संग्रहालय प्रांगण में तय ना ना मोर ना ना ना नाचैय गोड़ बाजय पैयारी तोर गीत पर लगभग 15 कलाकारों ने अपने कलात्मक नृत्य माध्यम से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। नृत्य प्रस्तुति के दौरान कलारिन बाई, रेखा, सुलोचना, मति बजरी बाई, नाहर सिंह, संजीव, दलवीर और बिहारी भवेदी आदि ने अपने नृत्य कौशल से दर्शकों का मन मोह लिया। प्रस्तुति के दौरान मांदल पर शिवचरण कुशराम और खुमान सिंह कुशराम ने, टिमकी पर सतीष भवेदी ने और शहनाई पर रवि मार्को ने सहयोग किया।
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इसी क्रम में हरदा के मंशाराम ने अपने साथी कलाकारों के साथ कारकू जनजाति का गदली नृत्य दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। इस नृत्य को विशेष पर्व-उत्सवों में और त्योहारों पर किया जाता है। इस नृत्य का आयोजन होली- दीपावली के अवसर पर होने के साथ ही साथ शादी-विवाह जैसे विशेष अवसरों पर भी होता है। नृत्य प्रस्तुति के दौरान नारायण, गणेश, ताराचंद, अन्नू, रामरती, पूजा और ज्योति आदि ने अपने नृत्य कौशल दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य प्रस्तुति के दौरान ढोल पर अनोखी लाल और बलराम ने और बाँसुरी पर मंशाराम और परशुराम ने सहयोग किया। 
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कार्यक्रम में तीसरी और अंतिम प्रस्तुति गीर सोमनाथ के मोरी जाकिर भाई ने अपने साथी कलाकारों के साथ सिद्धी जनजाति का सिद्धी धमाल नृत्य दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। इस नृत्य को शादी-विवाह के अवसर पर किया जाता है। इस नृत्य में नृत्य करने वाले कलाकारों का उत्साह और उल्लास देखने लायक होता है, इस नृत्य को ढोल पर किया जाता है। नृत्य  प्रस्तुति के दौरान ज़ाकिर, साहिल, एज़ाज़, रमजान और नसुरुद्दीन आदि ने अपने नृत्य कौशल से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रस्तुति के दौरान ढोल वादन में हुसैन,मोना, सादिक और इमरान ने सहयोग किया।                     
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