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तलत अजीज की गजलों से सजी मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या

तलत ने संस्कृति विभाग का अदा किया शुक्रिया
मैंने एक आशियाना बनाया था.. अब भी शायद वो जल रहा होगा
भारत भवन में तलत अजीज की संगीतमय ग़ज़ल संध्या
भोपाल. संस्कृति विभाग द्वारा आज मशहूर ग़ज़ल गायक तलत अजीज का ग़ज़ल कार्यक्रम संपन्न हुआ।उनका स्वागत भारत भवन  के बहिरंग में कार्यक्रम की पेशकश के पूर्व संस्कृति मंत्री डॉ विजय लक्ष्मी साधौ द्वारा किया गया।मंत्री डॉ साधौ ने तलत जी के साथी कलाकारों का भी स्वागत किया। गायक तलत जी ने संस्कृति विभाग,मप्र शासन का आमंत्रण के लिए शुक्रिया अदा किया। प्रथम ग़ज़ल  कैसे सुकून पाऊं तुझे देखने के बाद... से शुरू कर उन्होंने अनेक लोकप्रिय गजलें सुनाई।
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मप्र की स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर हुए इस कार्यक्रम को सुनने भारत भवन के मुक्ताकाश बहिरंग में बड़ी संख्या में ग़ज़ल और संगीत प्रेमी पहुंचे। इस अवसर पर प्रमुख सचिव संस्कृति श्री पंकज राग भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में मशहूर गायिका नूरजहां का गाया हुआ ... मैंने एक आशियाना बनाया था.. अब भी शायद वो जल रहा होगा... को भी तलत अजीज ने अपने अंदाज में पेश किया। इसके अलावा आपने आज जाने की जिद न करो...आयिना मुझसे मेरी पहले सी सूरत मांगे..जैसी मशहूर गजलें भी पेश की। मशहूर ग़ज़ल गायक तलत अजीज के इस कार्यक्रम  में वैसे तो उन गाई सभी गजलों की  पेशकश की सभी को पसंद आईं,लेकिन उमराव जान (1981) की ग़ज़ल जिंदगी...जा भी तेरी बज़्म में लाती है हमें....को बहुत सराहा गया। 
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